भागवत कथा एकमात्र मोक्ष का मार्ग है - डा मनोज मोहन शास्त्री
भागवत कथा एकमात्र मोक्ष का मार्ग है - डा मनोज मोहन शास्त्री
शुकदेव में महान ऋषि, वेदव्यास के पुत्र और परम ज्ञानी थे, जो 12 वर्षों तक गर्भ में रहने के बाद पैदा हुए
इंदौर। श्रीमद्भागवत का शुरम्भ हुआ आज दोपहर में खजराना गणेश मंदिर परिसर के दौलत राम छावछरिया में श्रीमद्भागवत का शुभारम्भ हुआ। कथा के पूर्व कलश यात्रा मंदिर परिसर निकली । शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी लोग शामिल हुए।
व्यास पीठ का पूजन यजमान नंदकिशोर पीपलावा, पुष्पा पीपलावा, कृष्ण मुरारी शर्मा, विजय पांडेय, बजरंग पीपलावा, श्याम सुंदर पीपलावा, दामोदर पीपलावा, आशीष पीपलावा, पवन पीपलावा, दिवाकर बिरथरे एवं मधु पीपलावा संजय गोयल ने किया।
डॉ मनोज मोहन शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा- शुकदेव में महान ऋषि, वेदव्यास के पुत्र और परम ज्ञानी थे, जो 12 वर्षों तक गर्भ में रहने के बाद पैदा हुए। वे जन्म से ही संसार से विरक्त (संन्यासी) थे और उन्होंने ही राजा परीक्षित को 'श्रीमद्भागवत पुराण' सुनाई शुकदेव ने अपने पिता व्यास से महाभारत का अध्ययन किया और उसे देवताओं को सुनाया था।
शुकदेव अयोनिज (बिना गर्भ के जन्म) माने जाते हैं, जो १२ वर्ष तक माता वाटिका के गर्भ में रहे और श्री कृष्ण के आश्वासन पर ही बाहर आए। जन्म लेते ही वे पूर्ण ज्ञानी थे और तपस्या के लिए वन की ओर चले गए।
उन्होंने ही महाभारत का ज्ञान देवताओं को दिया और परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर उन्हें मोक्ष दिलाया।
शुकदेव अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण की कृपा से गर्भ में जीवन पाया और कुरुवंश की रक्षा की। वे एक न्यायप्रिय राजा थे, लेकिन ऋषि पुत्र के शाप के कारण उन्हें 7 दिन में मृत्यु का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने शुकदेव से श्रीमद्भागवत कथा सुनी और मोक्ष प्राप्त किया।
राजा परीक्षित महाभारत के युद्ध के बाद पांडव वंश के एकमात्र जीवित वंशज के रूप में उनका जन्म हुआ। अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से श्रीकृष्ण ने उतरा के गर्भ में उनकी रक्षा की थी।
परीक्षित एक महान और धर्मात्मा राजा थे।
एक बार शिकार के दौरान भूख-प्यास से व्याकुल होकर उन्होंने ऋषि शमीक के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया। इससे क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र शृंगी ने उन्हें शाप दिया कि 7 दिनों में तक्षक नाग के काटने से उनकी मृत्यु होगी।शाप के बाद, राजा परीक्षित ने राज्य का त्याग कर दिया और शुकदेव जी से 7 दिनों तक ज्ञान प्राप्त किया।जिसे आज हम श्रीमद्भागवत पुराण के रूप में जानते हैं। शाप के अनुसार तक्षक नाग ने उन्हें काटा, भागवत के श्रवण के कारण राजा परिक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जीवन में भागवत कथा श्रवण मात्र मोक्ष का मार्ग है।कथा के मध्य चल भजन पर भक्त नृत्य करते रहे।
श्रीमद्भागवत प्रसंग- 8 अप्रेल - श्रीध्रुव चरित्र 9अप्रेल- प्रह्लाद चरित्र नृसिंहावतार,10अप्रेल - श्रीकृष्ण जन्मोत्सव11 अप्रेल - श्रीकृष्ण बाललीलाएँ एवं गिरिराज पूजन 12 अप्रेल - महारास एवं रुक्मिणी विवाह 13 अप्रेल - श्रीशुकदेव विदाई एवं व्यास पूजन होगा।
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन विश्व प्रसिद्ध
श्री खजराना गणेश मंदिर इंदौर में हो रही हैं।
वृंदावन निवासी प्रकांड विद्वान भगवताचार्य श्री श्री 108 श्री आचार्य डॉ मनोज मोहन शास्त्री प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक मन्दिर परिसर के दौलत राम छाबछरिया प्रवचन हाल में श्रवण करवा रहें।
भागवत कथा के आयोजक स्वयं सर्व शक्तिमान भगवान श्री कृष्ण है भागवत कथा की व्यवस्थाएं ।


